vaastu ke anusaar shayan kaksh kee sthiti

वास्तु के अनुसार शयन कक्ष की स्थिति – वैदिक वास्तु शास्त्र – vaastu ke anusaar shayan kaksh kee sthiti – vedic vastu shastra

बेडरूम घर का वह महत्वपूर्ण स्थान होता है जहां आप अपना सबसे ज्यादा समय बिताते हैं! पूरे दिन काम करने के उपरांत यह स्थान आपके शरीर और दिमाग को आराम और शांति प्रदान करता है! अच्छी नींद के लिए अनुकूल वातावरण आवश्यक है!
शारीरिक, मानसिक ऊर्जा की प्राप्ति तथा शिथिलता समाप्त करने के लिए अच्छी नींद आवश्यक है! पति-पत्नी के रिश्तों पर भी बेडरूम का काफी प्रभाव होता है! वास्तु- फेंगशुई के सिद्धांतों के अनुरूप बेडरूम की व्यवस्था तथा साज-सज्जा ही पति-पत्नी के बीच रिश्तों की मधुरता तय करती है!
बेडरूम के लिए उपयुक्त दिशाएं मास्टर बेडरूम घर के मुखिया का शयन कक्ष जिसे मास्टर बेडरूम भी कहा जाता है, घर के दक्षिण-पश्चिम (नैर्ऋत्य) में होना सर्वश्रेष्ठ है! विकल्प के रूप में उत्तर-पश्चिम (वायव्य) में भी शयन कक्ष उत्तम है! यदि घर दो मंजिला है तो मास्टर बेडरूम दूसरी मंजिल पर दक्षिण-पश्चिम में होना चाहिए! दक्षिण-पश्चिम का बेडरूम स्थिरता और महत्वपूर्ण मुद्दों को हिम्मत से हल करने में सहायता प्रदान करता है! बच्चों का बेडरूम बच्चों का बेडरूम उत्तर-पश्चिम या पश्चिम में होना चाहिए! अविवाहित बच्चों का बेडरूम अविवाहित लड़के का बेडरूम पूर्व या उत्तर-पूर्व दिशा में होना ठीक है!
विवाह योग्य कन्या का बेडरूम उत्तर-पश्चिम में रखना आवश्यक है! उत्तर-पश्चिम में कन्या का बेडरूम होने से विवाह उचित समय पर एवं शीघ्र होते हैं! गेस्ट रूम मेहमानों के लिए गेस्ट रूम उत्तर-पश्चिम, पूर्व अथवा उत्तर-पूर्व में बनाया जा सकता है! उत्तर-पश्चिम में गेस्ट रूम होने से उनके शीघ्र जाने की संभावना होती है! दक्षिण-पश्चिम का बेडरूम तो मेहमानों को कभी नहीं देना चाहिए अन्यथा वे लंबे समय के लिए घर में टिक जाएंगे जो घर के लोगों के लिए असुविधाजनक होगा!

वास्तु के अनुसार शयन कक्ष की स्थिति – vaastu ke anusaar shayan kaksh kee sthiti – वैदिक वास्तु शास्त्र – vedic vastu shastra

 

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