pathari ke prathmik gharelu chikitsa

पथरी की प्राथमिक घरेलू चिकित्सा – पुरुष रोग का घरेलू उपचार – pathari ke prathmik gharelu chikitsa – purush rog ka gharelu upchar

पथरी की प्राथमिक घरेलू चिकित्सा
लंबे समय तक पाचन शक्ति ठीक न रहने और मूत्र विकार भी बना रहे तो गुर्दों में कुछ तत्व इकट्ठे होकर पथरी का रूप धारण कर लेते हैं।

पथरी बन जाने पर गुर्दों में असहनीय दर्द होता है, जो कमर तक जाता है। यदि पथरी चने के आकार की होगी तो इस उपचार से मूत्र के साथ गलकर निकल जाएगी।
उपचार
गाजर व मूली के बीज 10-10 ग्राम, गोखरू 20 ग्राम, जवाखार और हजरुल यहूद 5-5 ग्राम, इन सबको कूट-पीसकर महीन चूर्ण कर लें। असकी 3-3 ग्राम की पुड़िया बना लें। एक खुराक 6 बजे, दूसरी खुराक 8 बजे और तीसरी शाम 4 बजे दूध-पानी की लस्सी के साथ लें। कुलथी का काढ़ा बनाकर दिन में दो बार सुबह 9 बजे और रात को सोने से पहले पिएँ। काढ़ा बनाने के लिए 20 ग्राम कुलथी को दो कप पानी में डालकर उबालें। ये दोनों प्रयोग लाभ होने तक लेते रहें।

पथरी की प्राथमिक घरेलू चिकित्सा – pathari ke prathmik gharelu chikitsa – पुरुष रोग का घरेलू उपचार – purush rog ka gharelu upchar

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