मंत्र से उपचार

kaise ahankar pati se nipatane ke liye

कैसे अहंकारी पति से निपटने के लिए – Lal Kitab ka totka

कैसे अहंकारी पति से निपटने के लिए – पत्नी-पत्नी के रिश्तों में झगड़ा या झगड़ा होना बहुत आम बात है। वैसे, यह सभी प्रकार के रिश्तों के बीच आम हो गया है। लेकिन जब विचार के अंतर लंबे समय तक बने रहते हैं और यह मुद्दा गहराता है, तो इसे सुधारने के प्रयास किए जाने …

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Injury, operation, fracture, spinal cord

चोट, ऑपरेशन, फ्रैक्चर, रीढ़ की हड्डी – मंत्र से उपचार | Injury, operation, fracture, spinal cord – mantra se upchar

मन्त्र:—– ॐ स्रां स्रीं स्रौं स: केतवे नम:। चोट, ऑपरेशन, फ्रैक्चर, रीढ़ की हड्डी और स्नायु तंत्र सम्बंधित रोग, बुरी लत, व्यसन, पागलपन, निम्न रक्त चाप इत्यादि। वातजनित बीमारियां, रक्तदोष, चर्म रोग, श्रमशक्ति की कमी, सुस्ती, अर्कमण्यता, शरीर में चोट, घाव, एलर्जी, आकस्मिक रोग या परेशानी, कुत्ते का काटना इत्यादि.

Dementia, leprosy, kidney disease

पागलपन, कुष्ठ रोग, गुर्दा सम्बन्धी रोग – मंत्र से उपचार | Dementia, leprosy, kidney disease – mantra se upchar

मन्त्र :— ॐ भ्रां भ्रीं भ्रौं स: राहवे नम:। पागलपन, कुष्ठ रोग, गुर्दा सम्बन्धी रोग, अल्सर, कैंसर, अल्सर, उच्च रक्तचाप, पेट सम्बन्धी बीमारियाँ, वायु विकार, ज़हरीले जीव जंतुओं के काटने के कारण होने वाले रोग। जब जनम कुंडली में राहु पाप ग्रहों से युत या दृष्ट हो , छटे -आठवें -बारहवें भाव में स्थित हो …

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Paralysis, stomach diseases

लकवा, पेट की बीमारियाँ – मंत्र से उपचार | Paralysis, stomach diseases – mantra se upchar

मन्त्र:— ॐ प्रां प्रीं प्रौं सः शनैश्चराय नम:। लकवा, पेट की बीमारियाँ, गठिया, वायु विकार, सिर दर्द, ह्रदय रोग, कैंसर, पैरों का फ्रैक्चर, व्यसन इत्यादि।शारीरिक कमजोरी, दर्द, पेट दर्द, घुटनों या पैरों में होने वाला दर्द, दांतों अथवा त्वचा सम्बन्धित रोग, अस्थिभ्रंश, मांसपेशियों से सम्बन्धित रोग,लकवा, बहरापन, खांसी, दमा, अपच, स्नायुविकार इत्यादि.

paralysis-diseases-and-weakness-in-the-genitals

लकवा, गुप्तांगो में रोग और कमजोरी – मंत्र से उपचार | Paralysis, diseases and weakness in the genitals – mantra se upchar

मन्त्र:—- ऊं द्रां द्रीं द्रौं स: शुक्राय नम:। लकवा, गुप्तांगो में रोग और कमजोरी, खून की कमी, पथरी, मूत्राशय सम्बन्धी रोग इत्यादि। दृष्टि सम्बन्धित रोग, जननेन्द्रिय सम्बन्धित रोग, मूत्र सम्बन्धित एवं गुप्त रोग, मिर्गी, अपच, गले के रोग, नपुंसकता, अन्त:स्त्रावी ग्रन्थियों से संबंधित रोग, मादक द्रव्यों के सेवन से उत्पन्न रोग, पीलिया रोग इत्यादि.

strong way to avoid stress and diseases

तनाव व रोगों से बचने का सशक्त उपाय – मंत्र से उपचार | Strong way to avoid stress and diseases – mantra se upchar

  तनाव व रोगों से बचने का सशक्त उपाय है मंत्र आचार्य हरिओम शास्त्री मंत्र ब्रह्ममय होने के कारण मंत्रशक्ति का मूल्यांकन आज तक कोई नहीं कर सका है इसमें साधक की इच्छा शक्ति काम करती है… गीता में भगवान श्री कृष्ण कहते हैं कि अपने अधीन किये हुए अंतःकरण वाला साधक अपने वश में …

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obesity-liver-disease

मोटापा, लीवर सम्बधित रोग – मंत्र से उपचार | Obesity, liver disease – mantra se upchar

मन्त्र:—-ॐ ग्रां ग्रीं ग्रौं स: गुरुवे नम:। मोटापा, लीवर सम्बधित रोग, पीलिया, थॉयरॉयड, मधुमेह, कैंसर, ट्यूमर, कान में रोग इत्यादि। लीवर, किडनी, तिल्ली आदि से सम्बन्धित रोग, कर्ण सम्बन्धी रोग, मधुमेह, पीलिया, याददाश्त में कमी, जीभ एवं पिण्डलियों से सम्बन्धित रोग, मज्जा दोष, यकृत पीलिया, स्थूलता, दंत रोग, मस्तिष्क विकार इत्यादि.

navagraha mantra

नवग्रह मंत्र – मंत्र से उपचार | Navagraha mantra – mantra se upchar

  ऊँ सं सर्वारिष्टनिवारणाय नवग्रहेभ्यो नमः ।। धन व समृद्धि को प्रदान करने वाले देवता गणेश हैं। सर्वप्रथम इनकी ही पूजा किसी शुभ कार्य के प्रारंभ में की जाती है। गणपति वंदना इस प्रकार है। वक्रतुण्ड महाकाय सूर्य कोटि समप्रभ। निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्व कार्येषु सर्वदा।। गणपति का सामान्य मंत्र है: ऊँ वक्रतुण्डाय हूं। …

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stinging skin disease

हकलाना चर्म रोग से सम्बंधित रोग – मंत्र से उपचार | Stinging skin disease – mantra se upchar

  मन्त्र:— ॐ ब्रां ब्रीं ब्रौं स: बुधाय नम: हकलाना, चर्म रोग, अवसाद, कमजोर यादाश्त, स्नायु तंत्र सम्बंधित समस्या, अस्थमा, आंत सम्बन्धी रोग इत्यादि।छाती से सम्बन्धित रोग, नसों से सम्बन्धित रोग, नाक से सम्बन्धित रोग, ज्वर, विषमय, खुजली, अस्थिभंग, टायफाइड, पागलपन, लकवा, मिर्गी, अल्सर, अजीर्ण, मुख के रोग, चर्मरोग, हिस्टीरिया, चक्कर आना, निमोनिया, विषम ज्वर, …

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ketu shanti

केतु शांति – मंत्र से उपचार | Ketu Shanti – mantra se upchar

  केतु की अनुकूलता के लिए मंगल, शनि व सोम का व्रत करें। ध्यान के लिए इस मंत्र का जप करें। ऊँ केतुं कृण्वन्न केतवे पेशो मर्या अपनयशसे। समुषद्भिरजायथाः।। ऊँ केतवे नमः ।। बीज मंत्र – ऊँ स्रां स्रीं स्रौं सः केतवे नमः।